ईथर को विलियमसन संश्लेषण द्वारा अल्कोहल से तैयार किया जाता है। इथेनॉल को $413 \ K$ पर सल्फ्यूरिक एसिड के साथ गर्म करने पर इथॉक्सी इथेन प्राप्त होता है। कॉलम-$I$ में दिए गए ईथर यौगिकों का $HI$ के साथ गर्म करने पर बनने वाले उत्पादों के साथ कॉलम-$II$ में मिलान कीजिए।
कॉलम-$I$ (ईथर)कॉलम-$II$ (उत्पाद)
$(A)$ $CH_3CH_2-CH(CH_3)-CH_2-OCH_2CH_3$$(i)$ $CH_3OH + CH_3-C(CH_3)_2-I$
$(B)$ $CH_3CH_2CH_2-O-C(CH_3)_2CH_2CH_3$(ii) $C_6H_5OH + C_6H_5CH_2I$
$(C)$ $C_6H_5CH_2-O-C_6H_5$(iii) $CH_3CH_2CH_2OH + CH_3CH_2-C(CH_3)_2-I$
$(D)$ $CH_3-C(CH_3)_2-O-CH_3$(iv) $CH_3CH_2-CH(CH_3)-CH_2OH + CH_3CH_2I$

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(A-IV, B-III, C-II, D-I) ईथर की $HI$ के साथ अभिक्रिया एल्काइल समूहों की प्रकृति के आधार पर $S_N1$ या $S_N2$ क्रियाविधि का पालन करती है।
$(A)$ $CH_3CH_2-CH(CH_3)-CH_2-OCH_2CH_3$ एक प्राथमिक ईथर है। कम बाधा वाली तरफ से विखंडन होता है,जिससे $CH_3CH_2-CH(CH_3)-CH_2OH$ और $CH_3CH_2I$ प्राप्त होते हैं $(A \rightarrow iv)$.
$(B)$ $CH_3CH_2CH_2-O-C(CH_3)_2CH_2CH_3$ में एक तृतीयक एल्काइल समूह होता है। विखंडन $S_N1$ के माध्यम से होता है और स्थिर तृतीयक कार्बोकेशन बनाता है,जिससे $CH_3CH_2CH_2OH$ और $CH_3CH_2-C(CH_3)_2I$ प्राप्त होते हैं $(B \rightarrow iii)$.
$(C)$ $C_6H_5CH_2-O-C_6H_5$ में एक बेंजाइल और एक फिनाइल समूह होता है। बेंजाइल कार्बन और ऑक्सीजन के बीच का $C-O$ बंध टूटता है,जिससे $C_6H_5CH_2I$ और $C_6H_5OH$ प्राप्त होते हैं $(C \rightarrow ii)$.
$(D)$ $CH_3-C(CH_3)_2-O-CH_3$ में एक तृतीयक एल्काइल समूह होता है। विखंडन $S_N1$ के माध्यम से होता है और स्थिर तृतीयक कार्बोकेशन बनाता है,जिससे $CH_3OH$ और $CH_3-C(CH_3)_2I$ प्राप्त होते हैं $(D \rightarrow i)$.

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