एक आदर्श गैस,प्रारंभ में $(P_{12}, V_1, T_1)$ अवस्था में है,इसका समदाबी प्रसार $(P_{12}, V_2, T_2)$ तक होता है,फिर रुद्धोष्म प्रक्रिया द्वारा $(P_{34}, V_3, T_3)$ तक प्रसार होता है। इसके बाद इसका समदाबी संकुचन $(P_{34}, V_4, T_4)$ तक होता है और अंत में रुद्धोष्म प्रक्रिया द्वारा वापस प्रारंभिक अवस्था में आ जाती है। इस चक्र की दक्षता है

  • A
    $1-\frac{T_4}{T_1}$
  • B
    $1-\frac{T_4}{T_2}$
  • C
    $1-\frac{T_3}{T_1}$
  • D
    $1-\frac{P_{34}}{P_{12}}$

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