एक परिपथ में धारा $5.0\, A$ से घटकर $0.1\, s$ में $0\, A$ हो जाती है। यदि $200\, V$ का औसत $emf$ प्रेरित होता है,तो परिपथ का स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) $H$ में ज्ञात कीजिए।

  • A
    $3$
  • B
    $2$
  • C
    $4$
  • D
    $5$

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एक कुंडली (coil) को आयताकार अनुप्रस्थ काट वाले कोर पर लपेटा गया है। यदि कोर के सभी रैखिक आयामों को $3$ के गुणक से बढ़ा दिया जाए और कुंडली की प्रति इकाई लंबाई में फेरों की संख्या समान रहे,तो स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) किस गुणक से बढ़ जाएगा?

$8 \,mH$ के स्व-प्रेरकत्व वाली एक कुंडली में धारा $3 \,A$ से बदलकर $1 \,A$ हो जाती है,जिसमें $0.1 \,s$ का समय लगता है। कुंडली में प्रेरित emf का मान क्या है?

एक एयर-कोर इंडक्टर (सोलेनोइड) का स्व-प्रेरकत्व $0.03 \ mH$ है। इंडक्टर में आयरन कोर डालने पर स्व-प्रेरकत्व बढ़कर $30 \ mH$ हो जाता है। उपयोग किए गए कोर की सापेक्ष पारगम्यता (relative permeability) है:

जब सोलेनोइड के फेरों की संख्या और लंबाई को दोगुना कर दिया जाता है और अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल समान रखा जाता है, तो प्रेरकत्व (inductance)

एक लंबी परिनालिका (solenoid) में $1500$ फेरे हैं। जब इसमें $3.5 \, A$ की धारा प्रवाहित होती है, तो परिनालिका के प्रत्येक फेरे से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स $2.8 \times 10^{-3} \, Wb$ है। परिनालिका का स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) है ($ \, H$ में)

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