कार्बोक्सिलिक अम्लों के एस्टरीकरण की क्रियाविधि समझाइए।

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(N/A) कार्बोक्सिलिक अम्लों का अल्कोहल के साथ एस्टरीकरण एक प्रकार का नाभिकरागी (nucleophilic) एसिल प्रतिस्थापन है। यह अभिक्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी होती है:
$(i)$ अम्ल उत्प्रेरक के $H^{+}$ द्वारा कार्बोनिल ऑक्सीजन का प्रोटोनीकरण होता है,जिससे प्रोटोनेटेड कार्बोक्सिलिक अम्ल $(X)$ प्राप्त होता है।
$(ii)$ प्रोटोनेटेड कार्बोनिल समूह अल्कोहल $(R'-OH)$ द्वारा नाभिकरागी आक्रमण के लिए सक्रिय हो जाता है,जिससे एक चतुष्फलकीय (tetrahedral) मध्यवर्ती $(M)$ बनता है।
$(iii)$ चतुष्फलकीय मध्यवर्ती $(M)$ में प्रोटॉन स्थानांतरण होता है,जो हाइड्रॉक्सिल समूह को एक बेहतर लीविंग ग्रुप $-OH_2^{+}$ में बदल देता है,जिससे मध्यवर्ती $(Y)$ प्राप्त होता है।
$(iv)$ मध्यवर्ती $(Y)$ जल के एक अणु को निष्कासित करके प्रोटोनेटेड एस्टर $(Z)$ बनाता है।
$(v)$ अंत में,प्रोटोनेटेड एस्टर $(Z)$ एक प्रोटॉन खोकर अंतिम एस्टर $(P)$ प्रदान करता है।

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