(N/A) $\rightarrow$ सभी प्रोटोजोआ परपोषी (heterotrophs) होते हैं और शिकारी या परजीवी के रूप में रहते हैं।
$\rightarrow$ इन्हें जानवरों का आदि संबंधी माना जाता है।
$\rightarrow$ इनका अध्ययन सबसे पहले ल्यूवेनहॉक द्वारा किया गया था।
$\rightarrow$ ये मनुष्यों और जानवरों में कई बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
$\rightarrow$ प्रोटोजोआ की सामान्य विशेषताएं:
$\rightarrow$ ये सूक्ष्म,एककोशिकीय और रंगहीन जीव हैं जो विभिन्न आकारों के होते हैं।
$\rightarrow$ प्रचलन उंगली जैसे कूटपाद (pseudopodia),कशाभिका (flagella) या बाल जैसे पक्ष्माभ (cilia) की मदद से होता है।
$\rightarrow$ श्वसन शरीर की सामान्य सतह के माध्यम से होता है।
$\rightarrow$ प्रजनन द्वि-विखंडन (binary fission),बहु-विखंडन या मुकुलन (budding) द्वारा होता है।
$\rightarrow$ लैंगिक प्रजनन संयुग्मन (conjugation) और सिन्गेमी द्वारा होता है।
$\rightarrow$ अमीबीय प्रोटोजोआ: ये जीव मीठे पानी,समुद्री पानी या नम मिट्टी में रहते हैं। ये अमीबा की तरह कूटपाद (pseudopodia) निकालकर चलते हैं और शिकार पकड़ते हैं। समुद्री रूपों की सतह पर सिलिका के कवच होते हैं। पोषण प्राणिसमभोजी होता है। एंटअमीबा जैसे कुछ जीव परजीवी होते हैं।
$\rightarrow$ कशाभिकीय प्रोटोजोआ: इस समूह के सदस्य या तो मुक्त-जीवी होते हैं या परजीवी। इनमें प्रचलन के लिए कशाभिका (flagella) होती है। पोषण प्राणिसमभोजी,मृतोपजीवी या परजीवी होता है। उदाहरण के लिए ट्रिपैनोसोमा (निद्रा रोग) और लीशमैनिया (काला-जार)।
$\rightarrow$ पक्ष्माभी प्रोटोजोआ: ये जलीय,सक्रिय रूप से चलने वाले जीव हैं क्योंकि इनमें हजारों पक्ष्माभ (cilia) होते हैं। इनमें एक गुहा (gullet) होती है जो कोशिका की सतह के बाहर खुलती है। उदाहरण के लिए पैरामीशियम।