| जगत मोनेरा | जगत प्रोटिस्टा |
|---|---|
| $(1)$ कोशिका भित्ति पेप्टिडोग्लाइकन (बैक्टीरिया में) की बनी होती है। | $(1)$ कोशिका भित्ति,यदि उपस्थित हो,तो सेल्युलोज या अन्य पदार्थों की बनी होती है। |
| $(2)$ श्वसन एंजाइम प्लाज्मा झिल्ली से जुड़े होते हैं। | $(2)$ श्वसन एंजाइम माइटोकॉन्ड्रिया के भीतर स्थित होते हैं। |
| $(3)$ राइबोसोम $70S$ प्रकार के होते हैं। | $(3)$ राइबोसोम $80S$ प्रकार के (कोशिकाद्रव्य में) होते हैं। |
| $(4)$ जीव प्रोकैरियोटिक होते हैं और इनमें नग्न गोलाकार $DNA$ होता है। | $(4)$ जीव यूकैरियोटिक होते हैं और इनमें केंद्रक के भीतर रैखिक $DNA$ होता है। |
| $(5)$ अतिरिक्त गुणसूत्रीय $DNA$ प्लाज्मिड के रूप में उपस्थित होता है। | $(5)$ अतिरिक्त गुणसूत्रीय $DNA$ माइटोकॉन्ड्रिया और क्लोरोप्लास्ट जैसे अंगों में उपस्थित होता है। |
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| स्तंभ $- I$ | स्तंभ $- II$ |
| $(a)$ मृतोपजीवी | $(i)$ कवक और पादप जड़ों के बीच सहजीवी संबंध |
| $(b)$ परजीवी | $(ii)$ मृत कार्बनिक पदार्थों का अपघटन |
| $(c)$ लाइकेन | $(iii)$ जीवित पौधों या जानवरों पर रहना |
| $(d)$ माइकोराइजा | $(iv)$ शैवाल और कवक का सहजीवी संबंध |
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