निम्नलिखित मिश्रणों के लिए शुद्धिकरण तकनीक बताइए:
$(i)$ क्लोरोफॉर्म और एनिलीन
$(ii)$ अशुद्ध एसीटोन
$(iii)$ अशुद्ध एनिलीन
$(iv)$ क्लोरोबेंजीन और ब्रोमोबेंजीन

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(N/A) $(i)$ साधारण आसवन: क्वथनांक में बड़े अंतर वाले तरल पदार्थों के लिए उपयोग किया जाता है।
$(ii)$ साधारण आसवन: अवाष्पशील अशुद्धियों से वाष्पशील तरल को अलग करने के लिए उपयोग किया जाता है।
$(iii)$ भाप आसवन: उन कार्बनिक यौगिकों के लिए उपयोग किया जाता है जो भाप के साथ वाष्पशील होते हैं और पानी में अघुलनशील होते हैं।
$(iv)$ प्रभाजी आसवन: क्वथनांक में कम अंतर वाले तरल पदार्थों के लिए उपयोग किया जाता है।

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निम्नलिखित में से किसका शुद्धिकरण ऊर्ध्वपातन द्वारा किया जा सकता है?

नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन $I$: प्रभाजी आसवन (fractional distillation) में उच्च क्वथनांक वाले द्रव की वाष्प, निम्न क्वथनांक वाले द्रव की वाष्प से पहले संघनित हो जाती है।
कथन $II$: प्रभाजी कॉलम (fractionating column) में ऊपर उठने वाली वाष्प में मिश्रण के उच्च क्वथनांक वाले घटक की सांद्रता बढ़ जाती है।

ग्लिसरॉल का शुद्धिकरण किसके द्वारा किया जाता है?

उच्च क्वथनांक वाला एक द्रव साधारण आसवन (simple distillation) पर विघटित हो जाता है,लेकिन इसे शुद्ध करने के लिए भाप आसवन (steam distillation) किया जा सकता है। समझाइए कि यह कैसे संभव है?

निम्नलिखित भौतिक परिवर्तन पर आधारित शुद्धिकरण विधि है $:$
$\text{Solid} (X)$ $\xrightarrow{\text{Heat}} \text{Vapour} (X)$ $\xrightarrow{\text{Cool}} \text{Solid} (X)$

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