बेंजीन,$m$-डाइनाइट्रोबेंजीन और टोल्यूनि में से कौन सबसे आसानी से नाइट्रीकरण (nitration) करेगा और क्यों?

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(N/A) नाइट्रीकरण की सुगमता एरोमैटिक वलय के इलेक्ट्रॉन घनत्व पर निर्भर करती है। नाइट्रीकरण एक इलेक्ट्रॉनस्नेही एरोमैटिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया है,जिसमें इलेक्ट्रॉनस्नेही नाइट्रोनियम आयन $(NO_2^+)$ इलेक्ट्रॉन-समृद्ध वलय पर आक्रमण करता है।
$1$. टोल्यूनि में $CH_3$ समूह एक इलेक्ट्रॉन-दाता समूह है ($+I$ प्रभाव और अतिसंयुग्मन),जो बेंजीन वलय के इलेक्ट्रॉन घनत्व को बढ़ाता है,जिससे यह बेंजीन की तुलना में इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन के प्रति अधिक सक्रिय हो जाता है।
$2$. $m$-डाइनाइट्रोबेंजीन में $NO_2$ समूह एक प्रबल इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूह है ($-I$ और $-M$ प्रभाव),जो बेंजीन वलय के इलेक्ट्रॉन घनत्व को काफी कम कर देता है,जिससे यह सबसे कम सक्रिय हो जाता है।
$3$. बेंजीन की सक्रियता मध्यम होती है।
अतः,टोल्यूनि सबसे आसानी से नाइट्रीकरण करता है। नाइट्रीकरण के प्रति सक्रियता का बढ़ता क्रम इस प्रकार है: $m$-डाइनाइट्रोबेंजीन < बेंजीन < टोल्यूनि।

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