कथन-$I$: पुष्पी पादपों में जल द्वारा परागण काफी दुर्लभ है और यह लगभग $30$ वंशों तक ही सीमित है।
कथन-$II$: जलोद्भिद पौधों के परागकणों को गीले होने से बचाने के लिए उन पर श्लेष्मी आवरण होता है।

  • A
    केवल कथन $I$ सही है।
  • B
    केवल कथन $II$ सही है।
  • C
    कथन $I$ और $II$ दोनों सही हैं।
  • D
    कथन $I$ और $II$ दोनों गलत हैं।

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पादपों में परागण के लिए सबसे सामान्य अजैव कारक कौन सा है?

$Eichhornia$ (जलकुंभी) और $Nymphaea$ (वाटर लिली) में परागण इनके द्वारा होता है:

यह परागण का एकमात्र प्रकार है जो परागण के दौरान वर्तिकाग्र पर आनुवंशिक रूप से भिन्न प्रकार के परागकण लाता है।

निम्नलिखित में से कौन सा जल-परागित पौधा है?

कीट-परागित पुष्प का वर्तिकाग्र सामान्यतः कैसा होता है?

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