प्रकाश-विद्युत प्रभाव के संदर्भ में निरोधी विभव (stopping potential) आपतित विद्युत-चुंबकीय विकिरण के निम्नलिखित गुण पर निर्भर करता है:

  • A
    कला (Phase)
  • B
    तीव्रता
  • C
    आयाम
  • D
    आवृत्ति

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जब एकवर्णी प्रकाश का एक बिंदु स्रोत फोटोइलेक्ट्रिक सेल से $0.2 \ m$ की दूरी पर होता है,तो कट-ऑफ वोल्टेज और संतृप्त धारा क्रमशः $0.6 \ V$ और $18 \ mA$ होती है। यदि उसी स्रोत को फोटोइलेक्ट्रिक सेल से $0.6 \ m$ दूर रखा जाए,तो:

निम्नलिखित ग्राफ एक दी गई धातु के लिए आपतित विकिरण की आवृत्ति $(v)$ के साथ निरोधी विभव (stopping potential) के परिवर्तन को दर्शाता है। सही परिवर्तन ग्राफ में दिखाया गया है [$v_0 =$ देहली आवृत्ति (threshold frequency)]।

एक धातु की सतह को $4500 \; \mathring A$ तरंगदैर्ध्य के विकिरण द्वारा प्रकाशित किया जाता है। उत्सर्जित फोटो-इलेक्ट्रॉन $2 \; mT$ के एक स्थिर चुंबकीय क्षेत्र में $90^{\circ}$ का कोण बनाते हुए प्रवेश करता है। यदि यह $2 \; mm$ त्रिज्या के वृत्ताकार पथ में घूमना शुरू करता है,तो धातु का कार्य फलन लगभग ............. $eV$ है।

एक निश्चित प्रयोग में फोटोइलेक्ट्रिक कट-ऑफ वोल्टेज $1.5 \ V$ है। उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा क्या है?

जब $4.0 \; eV$ ऊर्जा का एक फोटॉन धातु $A$ की सतह से टकराता है,तो उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा $T_{A} \; eV$ और डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda_{A}$ है। $4.50 \; eV$ ऊर्जा के फोटॉन द्वारा दूसरी धातु $B$ से मुक्त फोटोइलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा $T_{B} = (T_{A} - 1.5) \; eV$ है। यदि इन फोटोइलेक्ट्रॉन की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda_{B} = 2 \lambda_{A}$ है,तो धातु $B$ का कार्य फलन ............. $eV$ है।

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