एक आण्विक नाभिकरागी प्रतिस्थापन $(S_N1)$ अभिक्रिया की क्रियाविधि को उपयुक्त उदाहरण के साथ समझाइए।

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(N/A) तृतीयक ब्यूटाइल ब्रोमाइड और हाइड्रॉक्साइड आयन $(OH^-)$ के बीच $S_N1$ अभिक्रिया से तृतीयक ब्यूटाइल अल्कोहल प्राप्त होता है।
$(CH_3)_3C-Br + OH^- \longrightarrow (CH_3)_3C-OH + Br^-$
$S_N1$ अभिक्रिया की विशेषताएँ:
$(a)$ एक आण्विक गतिकी: अभिक्रिया की दर केवल अभिकारक तृतीयक ब्यूटाइल ब्रोमाइड की सांद्रता पर निर्भर करती है।
$(b)$ नाभिकरागी प्रतिस्थापन: अवशिष्ट समूह $Br^-$ को नाभिकरागी $OH^-$ द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है।
$(c)$ दो चरणों वाली प्रक्रिया: $S_N1$ अभिक्रियाएँ दो चरणों में पूरी होती हैं।
चरण-$I$ (धीमा चरण): $C-Br$ बंध का विषम विदलन होकर कार्बोकेशन $(CH_3)_3C^+$ और ब्रोमाइड आयन $Br^-$ बनते हैं। यह दर-निर्धारक चरण है।
चरण-$II$ (तेज चरण): नाभिकरागी $OH^-$ कार्बोकेशन पर आक्रमण करके अंतिम उत्पाद तृतीयक ब्यूटाइल अल्कोहल बनाता है।

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