आइंस्टीन का प्रकाश-विद्युत समीकरण ......... द्वारा दिया जाता है।

  • A
    $K.E._{max} = h\nu_{max} - \phi_0$
  • B
    $K.E. = h\nu_{max} - \phi_0$
  • C
    $K.E._{max} = h\nu - \phi_0$
  • D
    $K.E._{max} = \frac{hc}{\lambda_{max}} - \phi_0$

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यदि एक फोटोसेल से $0.2 \ m$ की दूरी पर रखे स्रोत द्वारा उत्सर्जित फोटो-इलेक्ट्रॉनों का निरोधी विभव (stopping potential) $0.6 \ V$ है,तो उसी स्रोत को $0.6 \ m$ की दूरी पर रखने पर उत्सर्जित फोटो-इलेक्ट्रॉनों का निरोधी विभव .......... $V$ होगा।

कथन : प्रकाशवैद्युत उत्सर्जन की प्रक्रिया में, सभी उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा समान नहीं होती है।
कारण : यदि किसी धातु की प्रकाश-संवेदी सतह पर गिरने वाले विकिरण में अलग-अलग तरंगदैर्ध्य शामिल हैं, तो अलग-अलग तरंगदैर्ध्य के फोटॉन को अवशोषित करने वाले इलेक्ट्रॉनों द्वारा प्राप्त ऊर्जा अलग-अलग होगी।

आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत प्रभाव को समझाइए और आइंस्टीन का प्रकाश-विद्युत समीकरण व्युत्पन्न कीजिए।

जब धातु पर गिरने वाले विकिरण की तरंग दैर्ध्य $500 \, nm$ से बदलकर $200 \, nm$ कर दी जाती है,तो फोटोइलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा तीन गुना हो जाती है। धातु का कार्य फलन (work function) लगभग $..... \, eV$ है।

उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा किस पर निर्भर करती है?

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