जब धातु पर गिरने वाले विकिरण की तरंग दैर्ध्य $500 \, nm$ से बदलकर $200 \, nm$ कर दी जाती है,तो फोटोइलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा तीन गुना हो जाती है। धातु का कार्य फलन (work function) लगभग $..... \, eV$ है।

  • A
    $0.61$
  • B
    $0.52$
  • C
    $0.81$
  • D
    $1.02$

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सूर्य का प्रतिबिंब $30 \ cm$ फोकस दूरी वाले लेंस द्वारा एक फोटोइलेक्ट्रिक सेल की धातु की सतह पर बनाया जाता है और एक फोटोइलेक्ट्रिक धारा $I$ उत्पन्न होती है। प्रतिबिंब बनाने वाले लेंस को समान व्यास लेकिन $15 \ cm$ फोकस दूरी वाले दूसरे लेंस से बदल दिया जाता है। इस स्थिति में फोटोइलेक्ट्रिक धारा क्या होगी?

किसी धातु से प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन के लिए कट-ऑफ आवृत्ति $\nu$ है। यदि $2\nu$ आवृत्ति का विकिरण धातु की प्लेट पर आपतित होता है,तो उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन का अधिकतम संभव वेग क्या होगा? ($m$ इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान है)

शून्य फोटो-इलेक्ट्रॉन धारा प्राप्त करने के लिए रिटार्डिंग विभव (स्टॉपिंग विभव):

हाइड्रोजन परमाणु में एक इलेक्ट्रॉन उत्तेजित अवस्था $n$ से मूल अवस्था (ground state) में कूदता है। इस प्रकार उत्सर्जित तरंगदैर्ध्य $2.75 \ eV$ कार्य फलन (work function) वाली एक प्रकाश-संवेदी सामग्री को प्रकाशित करती है। यदि फोटोइलेक्ट्रॉन का निरोधी विभव (stopping potential) $10 \ V$ है,तो $n$ का मान है

तरंगदैर्ध्य $\lambda$ का प्रकाश $\frac{hc}{\lambda_0}$ कार्य फलन वाली धातु पर गिरता है। प्रकाश वैद्युत प्रभाव केवल तभी होगा यदि ($\lambda_0$ देहली तरंगदैर्ध्य है)।

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