$2\,H$ प्रेरकत्व (inductance) वाली एक कुंडली से $2\,A$ की धारा $4\,A/s$ की दर से बढ़ रही है। प्रेरक में प्रति इकाई समय में संचित ऊर्जा ... $J/s$ है।

  • A
    $2$
  • B
    $1$
  • C
    $16$
  • D
    $4$

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यदि किसी कुंडली में बहने वाली धारा को उसके प्रारंभिक मान के आधे तक कम कर दिया जाए,तो कुंडली में संचित नई ऊर्जा $(E_2)$ और मूल ऊर्जा $(E_1)$ के बीच का संबंध क्या होगा?

$2\, H$ प्रेरकत्व वाली एक कुंडली जिसका प्रतिरोध नगण्य है,एक ऐसे आपूर्ति स्रोत से जुड़ी है जिसका वोल्टेज $V = 3t$ वोल्ट है (जहाँ $t$ सेकंड में है)। यदि वोल्टेज $t = 0$ पर लागू किया जाता है,तो $4\, s$ के बाद कुंडली में संचित ऊर्जा ............ $J$ है।

निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
$(a)$ प्रेरक (Inductor) चुंबकीय क्षेत्र के रूप में ऊर्जा संग्रहीत करता है।
$(b)$ संधारित्र (Capacitor) विद्युत क्षेत्र के रूप में ऊर्जा संग्रहीत करता है।
$(c)$ प्रेरक विद्युत और चुंबकीय दोनों क्षेत्रों के रूप में ऊर्जा संग्रहीत करता है।
$(d)$ संधारित्र विद्युत और चुंबकीय दोनों क्षेत्रों के रूप में ऊर्जा संग्रहीत करता है।

चित्र में, कुंडली में संचित चुंबकीय ऊर्जा है:

$10 \, \Omega$ प्रतिरोध और $5 \, H$ प्रेरकत्व वाली एक कुंडली को $100 \, V$ की बैटरी से जोड़ा जाता है। कुंडली में संचित ऊर्जा है:

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