$\omega $ आवृत्ति पर संचालित $LCR$ परिपथ के लिए,समीकरण $L\frac{di}{dt} + Ri + \frac{q}{C} = V_i = V_m \sin \omega t$ है।
$(a)$ समीकरण को $i$ से गुणा करें और जहाँ संभव हो सरल करें।
$(b)$ प्रत्येक पद की भौतिक व्याख्या करें।
$(c)$ समीकरण को ऊर्जा संरक्षण के कथन के रूप में लिखें।
$(d)$ एक चक्र पर समीकरण का समाकलन करें और ज्ञात करें कि $V$ और $i$ के बीच का कलांतर न्यूनकोण होना चाहिए।

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(N/A) $LCR$ परिपथ के लिए दिया गया समीकरण:
$L \frac{di}{dt} + Ri + \frac{q}{C} = V_m \sin \omega t$
$(a)$ दोनों पक्षों को $i$ से गुणा करने पर:
$Li \frac{di}{dt} + i^2 R + \frac{q}{C} i = V_m i \sin \omega t$
चूंकि $i = \frac{dq}{dt}$,हम लिख सकते हैं:
$\frac{d}{dt} \left( \frac{1}{2} L i^2 \right) + i^2 R + \frac{d}{dt} \left( \frac{q^2}{2C} \right) = Vi$
$(b)$ भौतिक व्याख्या:
$Li \frac{di}{dt} = \frac{d}{dt} (\frac{1}{2} L i^2)$ प्रेरक (inductor) में संचित चुंबकीय ऊर्जा के परिवर्तन की दर है।
$i^2 R$ प्रतिरोधक में जूल ऊष्मीय (शक्ति क्षय) की दर है।
$\frac{q}{C} i = \frac{d}{dt} (\frac{q^2}{2C})$ संधारित्र (capacitor) में संचित विद्युत ऊर्जा के परिवर्तन की दर है।
$Vi$ स्रोत द्वारा प्रदान की गई तात्कालिक शक्ति है।
$(c)$ समीकरण $\frac{d}{dt} (\frac{1}{2} L i^2 + \frac{q^2}{2C}) + i^2 R = Vi$ ऊर्जा संरक्षण को दर्शाता है,जहाँ स्रोत द्वारा प्रदान की गई शक्ति संचित ऊर्जा में परिवर्तन की दर और ऊष्मा के रूप में क्षयित शक्ति के योग के बराबर है।
$(d)$ एक चक्र $T = \frac{2\pi}{\omega}$ पर समाकलन करने पर:
$\int_0^T \frac{d}{dt} (\frac{1}{2} L i^2 + \frac{q^2}{2C}) dt + \int_0^T i^2 R dt = \int_0^T Vi dt$
चूंकि $L$ और $C$ में संचित ऊर्जा आवर्ती है,एक चक्र पर अवकलज का समाकलन शून्य होता है।
$0 + I_{rms}^2 R T = \int_0^T Vi dt$
चूंकि $I_{rms}^2 R T > 0$,औसत शक्ति $\int_0^T Vi dt$ धनात्मक होनी चाहिए। इसका अर्थ है कि $\cos \phi > 0$,अर्थात कलांतर $\phi$ न्यूनकोण होना चाहिए।

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