यदि $I$ धारा $N$ फेरों वाली कुंडली से $\phi$ चुंबकीय फ्लक्स उत्पन्न करती है,तो कुंडली के चारों ओर के माध्यम में संचित चुंबकीय ऊर्जा है

  • A
    $\frac{N \phi I}{4}$
  • B
    $\frac{N \phi I}{2}$
  • C
    $\frac{NI}{2 \phi}$
  • D
    $\frac{N \phi}{2 I}$

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कथन : यदि किसी परिनालिका (solenoid) में धारा की दिशा को परिमाण समान रखते हुए उलट दिया जाए,तो परिनालिका में संचित चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है।
कारण : चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा घनत्व चुंबकीय क्षेत्र के समानुपाती होता है।

$4 \, A$ की धारा वहन करने वाले $50 \, mH$ के प्रेरक (inductor) में संचित ऊर्जा $J$ में कितनी होगी?

एक कुंडली का प्रेरकत्व $2 \, H$ और प्रतिरोध $4 \, \Omega$ है। कुंडली पर $10 \, V$ का विभवांतर लगाया जाता है। जब धारा अपने संतुलन मान तक पहुँच जाती है,तो चुंबकीय क्षेत्र में संचित ऊर्जा $.......... \times 10^{-2} \, J$ होगी।

$20\, \Omega$ प्रतिरोध और $5\, H$ प्रेरकत्व वाली एक कुंडली को $100\, V$ की बैटरी से जोड़ा गया है। कुंडली में संचित ऊर्जा .... $J$ होगी।

जब एक प्रेरक (inductor) में धारा $80 \ mA$ होती है,तो उसमें संचित चुंबकीय स्थितिज ऊर्जा $64 \times 10^{-3} \ J$ होती है। इस प्रेरक का प्रेरकत्व (inductance) कितना है ($H$ में)?

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