$5 \mu H$ प्रेरकत्व वाले एक प्रेरक में $2 \ A$ की धारा प्रवाहित होने पर संचित चुंबकीय ऊर्जा है

  • A
    $10 \ mJ$
  • B
    $5 \ mJ$
  • C
    $10 \mu J$
  • D
    $5 \mu J$

Explore More

Similar Questions

एक कुंडली का प्रेरकत्व $2 \, H$ और प्रतिरोध $4 \, \Omega$ है। कुंडली पर $10 \, V$ का विभवांतर लगाया जाता है। जब धारा अपने संतुलन मान तक पहुँच जाती है,तो चुंबकीय क्षेत्र में संचित ऊर्जा $.......... \times 10^{-2} \, J$ होगी।

$L = 200 \ mH$ के स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) वाली कुंडली (coil) में $4 \ A$ की धारा स्थापित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा . . . . . . है। ($J$ में)

कथन : यदि किसी परिनालिका (solenoid) में धारा की दिशा को परिमाण समान रखते हुए उलट दिया जाए,तो परिनालिका में संचित चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है।
कारण : चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा घनत्व चुंबकीय क्षेत्र के समानुपाती होता है।

जब एक कुंडली (coil) से धारा $I$ प्रवाहित होती है,तो इसमें $E_1$ ऊर्जा संचित होती है। अब यदि धारा को घटाकर $I/2$ कर दिया जाए,तो कुंडली में संचित ऊर्जा $E_2$ हो जाती है। ऊर्जा में परिवर्तन क्या है?

$2\, H$ प्रेरकत्व वाली एक कुंडली जिसका प्रतिरोध नगण्य है,एक ऐसे आपूर्ति स्रोत से जुड़ी है जिसका वोल्टेज $V = 3t$ वोल्ट है (जहाँ $t$ सेकंड में है)। यदि वोल्टेज $t = 0$ पर लागू किया जाता है,तो $4\, s$ के बाद कुंडली में संचित ऊर्जा ............ $J$ है।

Vedclass Products

For Students

Vedclass Test Series

Mock tests in real JEE/NEET style with performance analysis. 5-day free trial.

Start Free Trial
For Teachers

Exam Paper Generator

Generate Set A/B/C/D exam papers from 7.5L+ questions in 2 minutes. 3 chapters free.

Try Free
For Institutes

Online Exam Module

Live online exams with unlimited students, 360° analytics & white-label branding.

See Demo