यदि किसी धातु की सतह से प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन के लिए प्रकाश की देहली तरंगदैर्ध्य (threshold wavelength) $6250 \ \text{Å}$ है, तो धातु का कार्य फलन (work function) क्या होगा ($\text{eV}$ में)? (प्लांक नियतांक $= 6.6 \times 10^{-34} \ \text{Js}$)

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एक प्रकाश-संवेदी पदार्थ की सतह का कार्य फलन $6.2\, eV$ है। आपतित विकिरण की तरंगदैर्ध्य,जिसके लिए निरोधी विभव (stopping potential) $5\, V$ है,किस क्षेत्र में स्थित है?

एक धातु का कार्य फलन (work function) $3 \ eV$ है। फोटोइलेक्ट्रॉन के उत्सर्जन के लिए आवश्यक दृश्य प्रकाश का रंग क्या है?

सिल्वर के लिए फोटोइलेक्ट्रिक थ्रेशोल्ड तरंगदैर्ध्य $\lambda_{0}$ है। $\lambda$ $(\lambda < \lambda_{0})$ आपतित तरंगदैर्ध्य द्वारा सिल्वर की सतह से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा क्या होगी?

जब आपतित विकिरण की ऊर्जा में $20 \%$ की वृद्धि की जाती है,तो धातु की सतह से उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा $0.5 \ eV$ से बढ़कर $0.8 \ eV$ हो जाती है। धातु का कार्य फलन (work function) है ($eV$ में)

इस प्रश्न में कथन-$1$ और कथन-$2$ दिए गए हैं। कथनों के बाद दिए गए चार विकल्पों में से,उस विकल्प को चुनें जो दोनों कथनों का सबसे अच्छा वर्णन करता है।
कथन-$1$: एक धात्विक सतह को $v > v_0$ (देहली आवृत्ति) आवृत्ति के एकवर्णी प्रकाश से विकिरणित किया जाता है। अधिकतम गतिज ऊर्जा और निरोधी विभव क्रमशः $K_{max}$ और $V_0$ हैं। यदि सतह पर आपतित आवृत्ति को दोगुना कर दिया जाए,तो $K_{max}$ और $V_0$ दोनों भी दोगुने हो जाते हैं।
कथन-$2$: सतह से उत्सर्जित प्रकाशिक इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा और निरोधी विभव आपतित प्रकाश की आवृत्ति पर रैखिक रूप से निर्भर करते हैं।

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