$L$ लंबाई वाले सोलेनोइड में संचित चुंबकीय ऊर्जा के लिए व्यंजक, चुंबकीय क्षेत्र $B$ और क्षेत्रफल $A$ के पदों में क्या है?

  • A
    $\frac{1}{2 \mu_0} B^2 AL$
  • B
    $\frac{1}{2 \epsilon_0} B^2 AL$
  • C
    $\frac{1}{2 \mu_0} BA^2 L$
  • D
    $\frac{1}{2 \epsilon_0} BA^2 L$

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कथन : यदि किसी परिनालिका (solenoid) में धारा की दिशा को परिमाण समान रखते हुए उलट दिया जाए,तो परिनालिका में संचित चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है।
कारण : चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा घनत्व चुंबकीय क्षेत्र के समानुपाती होता है।

जब एक प्रेरक (inductor) में धारा $80 \ mA$ होती है,तो उसमें संचित चुंबकीय स्थितिज ऊर्जा $64 \times 10^{-3} \ J$ होती है। इस प्रेरक का प्रेरकत्व (inductance) कितना है ($H$ में)?

यदि किसी कुंडली में बहने वाली धारा को उसके प्रारंभिक मान के आधे तक कम कर दिया जाए,तो कुंडली में संचित नई ऊर्जा $(E_2)$ और मूल ऊर्जा $(E_1)$ के बीच का संबंध क्या होगा?

यदि $I$ धारा $N$ फेरों वाली कुंडली से $\phi$ चुंबकीय फ्लक्स उत्पन्न करती है,तो कुंडली के चारों ओर के माध्यम में संचित चुंबकीय ऊर्जा है

$L$ प्रेरकत्व वाली कुंडली जिसमें $i$ स्थिर धारा प्रवाहित हो रही है,उसमें संचित ऊर्जा किस रूप में होती है?

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