फोटोइलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा कैसे बदलती है?

  • A
    आपतित विकिरण की तीव्रता के साथ व्युत्क्रमानुपाती और इसकी आवृत्ति से स्वतंत्र है।
  • B
    आपतित विकिरण की आवृत्ति के साथ व्युत्क्रमानुपाती और इसकी तीव्रता से स्वतंत्र है।
  • C
    आपतित विकिरण की आवृत्ति के साथ रैखिक रूप से बदलती है और इसकी तीव्रता पर निर्भर करती है।
  • D
    आपतित विकिरण की आवृत्ति के साथ रैखिक रूप से बदलती है और इसकी तीव्रता से स्वतंत्र है।

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$4000\, \mathring{A}$ तरंगदैर्ध्य वाले स्रोत को $10\, \text{cm}$ की दूरी पर रखने पर निरोधी विभव (stopping potential) $1.5\, \text{V}$ है। यदि अब स्रोत की दूरी बढ़ाकर $20\, \text{cm}$ कर दी जाए,तो निरोधी विभव ............... $\text{V}$ होगा।

मान लीजिए कि $v$ आपतित फोटॉन की आवृत्ति है और $v_0$ देहली आवृत्ति (threshold frequency) है। प्रकाशिक इलेक्ट्रॉनों (photoelectrons) के उत्सर्जन के लिए शर्त क्या है?

जब आपतित फोटॉन की तरंगदैर्घ्य कम की जाती है, तो:

$1.13 eV$ कार्य फलन वाली एक धातु की सतह को $310 nm$ तरंगदैर्ध्य के प्रकाश से विकिरणित किया जाता है। फोटोइलेक्ट्रॉनों के उत्सर्जन को रोकने के लिए आवश्यक मंदक विभव (retarding potential) क्या है ($V$ में)? [$hc = 1240 eV \cdot nm$ लें]

एक धातु का कार्य फलन (work function) $h \nu_0$ है। $\nu$ आवृत्ति का प्रकाश इस धातु पर गिरता है। प्रकाश-विद्युत प्रभाव (photoelectric effect) केवल तभी होगा यदि

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