दो कुंडलियों के अन्योन्य प्रेरण (Mutual inductance) को कैसे बढ़ाया जा सकता है?

  • A
    कुंडलियों में फेरों की संख्या घटाकर
  • B
    कुंडलियों में फेरों की संख्या बढ़ाकर
  • C
    कुंडलियों को लकड़ी के कोर पर लपेटकर
  • D
    उपरोक्त में से कोई नहीं

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$X$ और $Y$ दो धात्विक कुंडलियाँ इस प्रकार व्यवस्थित हैं कि जब कुंडली $X$ में प्रवाहित धारा में स्थिर परिवर्तन $4 \ A$ होता है,तो कुंडली $Y$ से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन $0.4 \ Wb$ होता है। इन कुंडलियों के निकाय का अन्योन्य प्रेरकत्व . . . . . . $H$ है।

दो कुंडलियों का अन्योन्य प्रेरण (mutual inductance) $0.005 \text{ H}$ है। पहली कुंडली में धारा समीकरण $I = I_0 \sin \omega t$ के अनुसार बदलती है, जहाँ $I_0 = 10 \text{ A}$ और $\omega = 60\pi \text{ rad s}^{-1}$ है। दूसरी कुंडली में प्रेरित e.m.f. का अधिकतम मान वोल्ट में क्या होगा ($\pi$ में)?

धारा $I$ ले जाने वाला एक लंबा सीधा तार और $a$ तथा $b$ भुजाओं की लंबाई वाला एक आयताकार फ्रेम चित्र में दिखाए अनुसार एक ही तल में स्थित हैं। तार और फ्रेम का अन्योन्य प्रेरकत्व (mutual inductance) क्या है?

$r$ त्रिज्या वाली एक वृत्ताकार कुंडली को $R$ त्रिज्या वाली दूसरी वृत्ताकार कुंडली पर रखा गया है। बड़ी कुंडली से बहने वाली धारा बदल रही है और उनके केंद्र संपाती हैं। यदि $R \gg r$ है और दोनों कुंडलियाँ एक ही तल में हैं, तो उनके बीच का अन्योन्य प्रेरकत्व (mutual inductance) किसके समानुपाती है?

$r_{1}$ और $r_{2}$ $(r_{2} \ll r_{1})$ त्रिज्या वाली दो संकेंद्रित वृत्ताकार कुंडलियों को समाक्षीय रूप से इस प्रकार रखा गया है कि उनके केंद्र संपाती हैं। इस व्यवस्था का अन्योन्य प्रेरकत्व (Mutual Inductance) ज्ञात कीजिए। (दोनों कुंडलियों में एक ही फेरा है,$\mu_{0} =$ निर्वात की पारगम्यता)

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