आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार, उत्सर्जित प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा बनाम आपतित विकिरण की आवृत्ति का ग्राफ एक सीधी रेखा देता है, जिसका ढाल

  • A
    आपतित विकिरण की तीव्रता पर निर्भर करता है।
  • B
    उपयोग की गई धातु की प्रकृति पर निर्भर करता है।
  • C
    सभी धातुओं के लिए समान होता है और विकिरण की तीव्रता से स्वतंत्र होता है।
  • D
    आपतित विकिरण की तीव्रता और उपयोग की गई धातु की प्रकृति दोनों पर निर्भर करता है।

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एक धातु से प्रकाश-विद्युत प्रभाव के लिए देहली तरंगदैर्ध्य $200 \ nm$ है। जब $100 \ nm$ तरंगदैर्ध्य का विकिरण धातु पर आपतित होता है,तो उत्सर्जित फोटो-इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा .......... $eV$ होगी।

जब ${\nu _1}$ और ${\nu _2}$ $({\nu _1} > {\nu _2})$ आवृत्ति का प्रकाश धातु की सतह पर आपतित होता है,तो उत्सर्जित फोटो-इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा का अनुपात $1:k$ है। धातु की देहली आवृत्ति (threshold frequency) क्या है?

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प्रकाश के किस सिद्धांत द्वारा प्रकाश-विद्युत प्रभाव (photoelectric effect) को समझाया जा सकता है?

मान लीजिए कि $\lambda_1$ तरंगदैर्ध्य के प्रकाश द्वारा उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा $K_1$ है और $\lambda_2$ तरंगदैर्ध्य के संगत अधिकतम गतिज ऊर्जा $K_2$ है। यदि $\lambda_1 = 2\lambda_2$ है,तो:

प्रकाश-विद्युत प्रभाव (photoelectric effect) में, निरोधी विभव (stopping potential) किस पर निर्भर करता है?

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